ज्वालामुखी में विस्फोटों से शुरू हुआ जलवायु परिवर्तन
ज्वालामुखी में विस्फोटों से शुरू हुआ जलवायु परिवर्तनवैज्ञानिकों के मुताबिक, आज से लगभग 17,700 साल पहले शुरू हुए जलवायु परिवर्तन में अंटार्कटिक के चारों ओर चलने वाली पश्चिमी हवाएं अचानक ध्रुव की ओर जाने लगी थीं। वाशिंगटन, प्रेट्र । दक्षिण गोलार्ध में जलवायु परिवर्तन की शुरुआत 17,700 साल पहले हुई। इसकी वजह उस दौरान (लगभग 192 वर्षो में) अंटार्कटिक पर ज्वालामुखियों के श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों से ग्लेशियरों का पिघलने में आई तेजी थी। 1अमेरिकी वैज्ञानिकों के हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है।वैज्ञानिकों के मुताबिक, आज से लगभग 17,700 साल पहले शुरू हुए जलवायु परिवर्तन में अंटार्कटिक के चारों ओर चलने वाली पश्चिमी हवाएं अचानक ध्रुव की ओर जाने लगी थीं। इसके साथ ही समुद्र की बर्फ की मात्र और समुद्र से जुड़े बदलाव भी हुए थे। इन बदलावों के साक्ष्य दक्षिणी गोलार्ध के कई हिस्सों में पाए गए, लेकिन ये बदलाव बरकरार कैसे रहे इस बात की व्याख्या फिलहाल नहीं हो पाई है।अमेरिका में डेजर्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के जोसेफ आर मैक्कनल के मुताबिक, अंटार्कटिक की बर्फ के मूल के रासायनिक विश्लेषण पर पता चला है कि पश्चिमी अंटार्कटिक माउंट ताकाहे ज्वालामुखी से निकलने वाले हैलोजन से युक्त लावा का उत्सर्जन ठीक उसी समय हुआ, जब दक्षिणी गोलार्ध में व्यापक जलवायु परिवर्तन तेज होना शुरू हुआ। उस समय ग्रीन हाउस गैसों की मात्र का वैश्विक स्तर बढ़ना शुरू हुआ।मैक्कनल ने कहा, हमारा मानना है कि हैलोजन युक्त इस उत्सर्जन से अंटार्कटिक पर समतापमंडलीय ओजोन छिद्र बन गया। इससे दक्षिणी गोलार्ध के वातावरण और जलीय जलवायु में बदलाव हुए।यह भी पढ़ेंः चीन के खिलाफ भारत को मिला जापान का साथBy Sanjeev Tiwari Let's block ads! (Why?)
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