ईरान के साथ संघर्ष चौथा दिन (D.B.News): ब्रिटेन के बाद स्पेन ने एयर बेस इस्तेमाल से किया मना, ट्रंप ने व्यापारिक संबंध खत्म करने की दी धमकी
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के खिलाफ हवाई और नौसैनिक कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले ब्रिटेन द्वारा भी अपने एयरबेस के उपयोग को लेकर अनिच्छा जताने पर ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश प्रधानमंत्री की आलोचना की थी।
वॉशिंगटन/मैड्रिड (D.B.News): देशबंधु न्यूज़ (D.B.News) ने अपने वेबसाइट पर प्रकाशित समाचार में बताया है कि, ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के संबंधों में दरार के संकेत मिल रहे हैं।
स्पेन द्वारा अपने वायुसेना अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति न देने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्पेन का रुख नहीं बदला तो अमेरिका उसके साथ सभी प्रकार के व्यापारिक संबंध समाप्त कर देगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के खिलाफ हवाई और नौसैनिक कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले ब्रिटेन द्वारा भी अपने एयरबेस के उपयोग को लेकर अनिच्छा जताने पर ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश प्रधानमंत्री की आलोचना की थी।
जर्मन चांसलर के साथ बैठक में बयान
मंगलवार को व्हाइट हाउस में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बैठक के दौरान मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने स्पेन के रुख को “अस्वीकार्य” बताया। उन्होंने कहा, “हम स्पेन के साथ सारा व्यापार बंद करने जा रहे हैं। हमें स्पेन से कोई संबंध नहीं रखना। मैंने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को निर्देश दिया है कि स्पेन के साथ सभी लेन-देन की समीक्षा कर उन्हें रोकने की प्रक्रिया शुरू करें।” ट्रंप का यह बयान कूटनीतिक हलकों में गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि स्पेन नाटो का सदस्य है और अमेरिका का दीर्घकालिक रक्षा साझेदार भी रहा है।
एयरबेस विवाद क्या है?
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिए यूरोप स्थित सहयोगी देशों के एयरबेस का उपयोग करने का अनुरोध किया था। स्पेन ने इस अनुरोध पर सहमति नहीं दी। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेन की यह अनिच्छा यूरोप के भीतर बढ़ती राजनीतिक असहमति और मध्य-पूर्वी संघर्ष में प्रत्यक्ष भागीदारी से बचने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। इससे पहले ब्रिटेन ने भी अपने एयरबेस के इस्तेमाल पर हिचक दिखाई थी। उस समय ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर की आलोचना करते हुए कहा था कि सहयोगियों को “निर्णायक भूमिका” निभानी चाहिए।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने कहा कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। उनके अनुसार, “ईरान की कमर तोड़ दी गई है। उसके हवाई और नौसेना अड्डों को तबाह कर दिया गया है। उनकी मिसाइलों को लगातार मार गिराया जा रहा है।” उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई अमेरिकी हितों और क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी। ट्रंप के मुताबिक, उन्हें आशंका थी कि परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत ठप होने के बाद ईरान अमेरिका पर हमला कर सकता है। ट्रंप ने कहा, हमें स्पष्ट संकेत मिल रहे थे कि वे हमारे खिलाफ आक्रामक रुख अपना सकते हैं। हमने पहले कदम उठाया”।
कांग्रेस को भेजा आधिकारिक पत्र
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संबंध में कांग्रेस को आधिकारिक सूचना भी भेजी है। पत्र में उन्होंने 28 फरवरी को किए गए हमलों को “आवश्यक और वैध” ठहराया। उन्होंने लिखा कि यह अभियान अमेरिकी नागरिकों, क्षेत्रीय साझेदारों और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार की निर्बाध आवाजाही की सुरक्षा के लिए चलाया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है।
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन पर टिप्पणी
ईरान में हालिया घटनाक्रम और नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि यह “ईरान का आंतरिक मामला” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी विशेष व्यक्ति को सत्ता में लाने का समर्थन नहीं कर रहा है। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के संभावित नाम पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, “यह ईरानियों का फैसला होना चाहिए। हम किसी नाम का समर्थन नहीं कर रहे।”
कूटनीतिक असर और संभावित परिणाम
ट्रंप की स्पेन को दी गई चेतावनी से ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका है। यूरोपीय संघ के सदस्य देश पहले ही मध्य-पूर्वी संघर्ष को लेकर सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका वास्तव में स्पेन के साथ व्यापारिक संबंधों पर अंकुश लगाता है, तो इसका असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अमेरिका और स्पेन के बीच रक्षा, ऊर्जा, कृषि और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में व्यापक व्यापार होता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह चेतावनी केवल दबाव बनाने की रणनीति है या वास्तविक नीति परिवर्तन का संकेत।
नाटो की एकजुटता पर सवाल
स्पेन और ब्रिटेन जैसे सहयोगी देशों की हिचक से नाटो की एकजुटता पर भी सवाल उठने लगे हैं। अमेरिका लंबे समय से यह अपेक्षा करता रहा है कि उसके सहयोगी वैश्विक सुरक्षा अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाएं। यदि यूरोपीय देश प्रत्यक्ष सैन्य समर्थन से दूरी बनाए रखते हैं, तो अमेरिका को अपने अभियानों के लिए वैकल्पिक रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
विवाद गहराने की आशंका
फिलहाल, स्पेन की ओर से ट्रंप के बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से संवाद जारी रहने की संभावना है। ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई और उससे जुड़े वैश्विक समीकरणों के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका है। स्पेन के साथ व्यापारिक संबंध खत्म करने की ट्रंप की चेतावनी केवल द्विपक्षीय मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों और वैश्विक शक्ति संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या दोनों देश कूटनीतिक रास्ता निकालते हैं या यह टकराव और बढ़ता है।
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(समाचार व फोटो साभार- D.B.News / मल्टी मीडिया)
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