शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होने से बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और हीन भावना: नायडू
नई-दिल्ली: उपराष्ट्रपति एम• वैंकेया नायडू ने प्राथमिक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा बनाने पर जोर दिया और कहा कि, शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी होने से बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और हीन भावना पनपती है।
उपराष्ट्रपति ने हिन्दी दिवस पर आयोजित समारोह में कहा कि, शिक्षा और ज्ञान का पहला संस्कार मातृभाषा में ही पड़ता है। मैं वह दिन देखना चाहता हूँ जब हमारी प्राथमिक शिक्षा का माध्यम हमारी मातृभाषा होगी। इससे हम उच्चतर शिक्षा और शोध में भी मातृभाषा का प्रयोग कर सकेंगे। इससे प्रशासन में भी मातृभाषा की सहज स्वीकार्यता बढ़ेगी और उसका अधिकारिक प्रयोग होगा।
उपराष्ट्रपति के इस कथन पर प्रतिक्रिया ब्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (उ• प्र•)- सच्चिदानन्द श्रीवास्तव ने कहा कि यह बात कोई आम आदमी कहता तो स्वीकार्य होती परन्तु उपराष्ट्रपति इस बात को कहे तो लगता है कि सरकार में इच्छा शक्ति की कमी है और लोकलुभावन वक्तव्य देना मजबूरी बन चुकी है अन्यथा संविधान में राष्ट्र भाषा "हिन्दी" की उपयोगिता का प्रावधान होने के उपरान्त इस प्रकार का वक्तव्य नहीं आता। और यदि नायडू जी देश के उपराष्ट्रपति होकर भी शिक्षा का माध्यम मातृ भाषा/ राष्ट्रभाषा में अनिवार्य नहीं कर सकते तो कब करेंगे।
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