टीईटी मुद्दे पर शिक्षकों से धैर्य बनाए रखने की अपील: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उ. प्र.
सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मिलेगी मुक्ति : शिवशंकर सिंह
प्रदेश अध्यक्ष के उरई आगमन पर शिक्षकों ने किया जोरदार स्वागत
उरई (जालौन): सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से अवश्य मुक्ति मिलेगी। शिक्षक धैर्य बनाए रखें किसी भी शिक्षक का अहित नहीं होगा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।
उक्त बात राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह व पूर्व प्रदेश महामंत्री भगवती सिंह के साथ दिनांक 01 मई 2026 को उरई आगमन पर गोविंदम रेस्टोरेंट में शिक्षकों से कही। शिक्षकों ने गर्मजोशी के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
उन्होंने बताया कि टीईटी के मुद्दे पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने संगठन को आश्वासन दिया है कि पूर्व से कार्यरत किसी भी शिक्षक का अहित नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार सभी आवश्यक कदम उठाएगी। इससे पूर्व राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से टीईटी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की थी जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।
उन्होंने बताया कि शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति, पुरानी पेंशन बहाली, शत प्रतिशत शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान, आरटीई के अनुसार विद्यालय संचालन अवधि 4 से 5 घंटे करने, शिक्षकों के जनपदीय और गैर जनपदीय तबादलों की एक स्थाई नीति बनाने, पदोन्नति पर न्यूनतम 17140/18150 वेतनमान देने जैसी ज्वलंत समस्याओं के निराकरण के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ सतत प्रयासरत है।
इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव, जिला महामंत्री इलयास मंसूरी, एडेड संवर्ग के संगठन मंत्री विकास कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव गुर्जर, प्रवक्ता सलिल कांत श्रीवास, अभिषेक पुरवार, अखिलेश रजक, प्रदीप कुमार सिंह, आलोक गुप्ता, नवनीत श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव, विनीत श्रीवास्तव सहित आधा सैकड़ा पदाधिकारी व शिक्षक मौजूद रहे।
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