स्पेक्ट्रम नीलामी से संबंधित सुझाव जल्द लाएगा ट्राई
नयी दिल्ली: दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन आर एस शर्मा अपने आधार क्रमांक को सार्वजनिक कर नुकसान पहुंचाने की खुली चुनौती देकर बड़ी बहस के केंद्र में आ गए हैं जिनका कार्यकाल 9 अगस्त को ही पूरा हो रहा है। किरण राठी ने शर्मा से इस विवाद की पृष्ठभूमि के साथ उनके कार्यकाल से जुड़े मसलों पर बात की.
ट्राई चेयरमैन के तौर पर अपने कार्यकाल को कैसे आंकते हैं?
मैं व्यक्तिगत उपलब्धियों में यकीन नहीं करता हूं। ट्राई ने जो कुछ भी हासिल किया है वह सभी लोगों की सामूहिक उपलब्धि है। दूसरा, मैंने नियमन के संदर्भ में खुद भी ट्राई से बहुत कुछ सीखा है जिससे मैं समृद्ध हुआ हूं। हम पारदर्शिता और परामर्श को एक नए स्तर पर ले गए हैं। हम दूरसंचार कारोबारी परिदृश्य के सभी पहलुओं पर नजर रखने में सफल रहे हैं चाहे वह सेवा की गुणवत्ता हो, इंटरकनेक्शन हो या शुल्क दरें हो। गत पांच वर्षों में डेटा भी दूरसंचार क्षेत्र का अहम पहलू साबित हुआ है। आज के समय में अमेरिका और चीन दोनों के जोड़ से भी अधिक डेटा उपभोग भारत में हो रहा है। वॉयस से डेटा की तरफ तवज्जो बढऩे से नए इलाके भी सामने आए हैं और हम उनके साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। हमने कुछ नए सिस्टम शुरू किए हैं और डेटा-संचालित नियमन भी कर रहे हैं। हम ब्लॉकचेन तकनीक लेकर आए हैं लिहाजा हम अद्यतन रहने के लिए तकनीक का सहारा ले रहे हैं और उससे नियमन की लागत भी कम हुई है। वैसे ये सारे काम मिलजुलकर ही किए जा सके हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद आपका अगला कदम क्या होगा?
जिंदगी चलती रहेगी। सच कहूं तो मैंने इस बारे में कुछ सोचा ही नहीं है। मैंने लोकसेवा में रहते हुए 40 साल बिता दिए हैं। देखूंगा कि आगे क्या करना है।
कोई ऐसा काम जिसके बारे में लगता है कि अधूरा रह गया?
यह किसी एक शख्स की बात नहीं है। ट्राई एक संस्था है और हमेशा ढेर सारे काम बाकी रह जाएंगे। देरी होने पर भी काम चलता रहेगा। मेरे मन में इस बात को लेकर कोई मलाल नहीं है कि मैं अमुक काम पूरा नहीं कर पाया।
रिलायंस जियो ने दूरसंचार बाजार में हलचल मचा दी है और उसका दबदबा अब भी कायम है। क्या इससे मौजूदा ऑपरेटरों को आगे भी नुकसान होगा?
मैं दूरसंचार बाजार के ढांचे, सक्रिय कंपनियों और इसमें सक्रिय कारोबारियों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन मुझे बाजार में तीव्र प्रतिस्पद्र्धा की स्थिति नजर आ रही है। बाजार में पहले से ही सेवाओं के शुल्क काफी कम हैं और काफी हद तक समेकन भी हुआ है जो मेरे हिसाब से अच्छा ही है। दुनिया भर में हम देखते हैं कि बाजार में 3-4 कंपनियों का होना सामान्य बात है। लिहाजा मुझे नहीं लगता है कि यह कोई बुरी बात है। वैसे ये फैसले कारोबारी होते हैं।
स्पेक्ट्रम की नीलामी से संबंधित अनुशंसाएं कब आएंगी?
मैं कोई समयसीमा तो नहीं दे सकता लेकिन इतना कह सकता हूं कि ट्राई जल्द ही ये सुझाव देगा।
देश में दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता ठीक नहीं पर यहां 5जी की बात हो रही है। ये दोनों बातें एक साथ कैसे चल सकती हैं?
मुझे नहीं लगता है कि इन दोनों बातों में कोई अंतर्विरोध है। सेवा की गुणवत्ता के मुद्दे पर हम काम करते रहे हैं और अब नए मानक तय हो जाने के बाद धीरे-धीरे हालात बेहतर होंगे। जहां तक 5जी का सवाल है तो मेरा मानना है कि भारत इस तकनीक की शुरुआत के लिए एकदम माकूल स्थिति में है। कृषि और सिंचाई जैसे सामाजिक क्षेत्रों के लिए भी 5जी तकनीक का इस्तेमाल कारगर हो सकता है।
श्रीकृष्ण समिति ने यह नहीं कहा कि उपभोक्ता ही अपने डेटा का असली मालिक है लेकिन ट्राई का यह एक अहम प्रस्ताव था..
मुझे लगता है कि दोनों मामलों की तुलना नहीं की जानी चाहिए। श्रीकृष्ण समिति जो कुछ भी कर रहा है वह सारे देश के लिए है।
(साभार- बी.एस.)
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