
संसद प्रश्न (अंतरिक्ष विभाग): आर्टेमिस कार्यक्रम
नई दिल्ली (PIB): आर्टेमिस समझौते, आर्टेमिस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से असैनिक अन्वेषण और बाहरी अंतरिक्ष के उपयोग को बढ़ाने के लिए सिद्धांतों, दिशानिर्देशों और सर्वोत्तम प्रथाओं का एक व्यावहारिक समूह है।
भारत ने 21 जून 2023 को आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 27वां देश बन गया है। हालांकि, भारत नासा के नेतृत्व वाले आर्टेमिस कार्यक्रम में भागीदार नहीं है, जो कि नासा के नेतृत्व में मनुष्यों को चंद्रमा और इसके इतर वापस लाने के लिए एक मिशन संचालित है। भारत ने अपने स्पेस विजन 2047 के तहत अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए अपने महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण को रेखांकित किया है। इसमें चंद्र अन्वेषण के लिए चंद्रयान श्रृंखला और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की ओर ले जाने वाले गगनयान निरंतरता कार्यक्रम जैसे मिशन शामिल हैं, जो अंतरिक्ष अन्वेषण में प्रगति के लिए देश के विजन को दर्शाता है।
अमरीका की मेसर्स एक्सिओम स्पेस इंक के साथ अंतरिक्ष उड़ान समझौते के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए आगामी इसरो-नासा संयुक्त मिशन के लिए स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजने की योजना बनाई गई है।
प्रक्षेपण वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही (क्यू2) के दौरान होने की उम्मीद है।
यह जानकारी आज लोक सभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा अंतरिक्ष विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने दी।
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