*नया साल, नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य*
नए साल पर अपनी आशाएँ रखना हमारे लिए बहुत अच्छी बात है, हमें यह भी समझने की ज़रूरत है कि आशाओं के साथ निराशाएँ भी आती हैं।
जीवन द्वंद्व का खेल है और नया साल भी इसका अपवाद नहीं है। यदि हम 'बीते वर्ष' पर ईमानदारी से विचार करें, तो हमें एहसास होगा कि हालांकि यह आवश्यक नहीं है कि, वर्ष ने वह प्रदान किया हो जो हमने उससे चाहा था, लेकिन इसने हमें कुछ बहुमूल्य सीख और अनुभव अवश्य दिए।
ये अलग से बहुत महत्वपूर्ण नहीं लग सकते हैं, लेकिन संभवतः ये प्रकृति का हमें उस उपहार के लिए तैयार करने का तरीका है जो उसने हमारे लिए रखा है जिसे वह अपनी समय सीमा में वितरित करेगी। साथ ही, अगर साल ने हमसे कुछ बहुत कीमती चीज़ छीन ली है, तो निश्चित रूप से उसने उसकी समान मात्रा में भरपाई भी कर दी है।
वर्ष के अंत में, हमें एहसास होता है कि हमारी बैलेंस शीट काफी उचित है। तो, आइए हम आने वाले वर्ष में इस विश्वास के साथ प्रवेश करें कि नए साल का जादू यह जानने में निहित है कि चाहे कुछ भी हो, हर निराशा के लिए मुआवजा होगा, हर इच्छा की पूर्ति के लिए एक सीख होगी।
-:प्रियंका सौरभ:-
हिसार (हरियाणा): वर्ष 2023 समाप्ति के कगार पर है तथा नव-वर्ष के आगमन में कुछ दिन शेष हैं और इस अवसर पर रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार - श्रीमती प्रियंका सौरभ ने अपने उद्गार को शब्दों में बड़ी ही खूबसूरती के साथ अलंकृत कर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है जो प्रशंसनीय है तथा उनकी इस प्रस्तुति को उन्ही के शब्दों में यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है:
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