लहू बोलता भी है: जंगे आज़ादी ए हिन्द के एक और मुस्लिम किरदार -
आइये जाानते हैं, जंगे आज़ादी ए हिन्द के एक और मुस्लिम किरदार- मोहम्मद यूनुस से_____
मोहम्मद यूनुस
हिन्दुस्तान की आज़ादी के बाद मुल्क के पहले वज़ीरे आज़म पंडित जवाहरलाल नेहरू बने लेकिन आज़ादी से पहले सन् 1935 में ब्रिटिश पार्लियामेंट ने एक गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट पास किया था। जिसके तहत सूबे की सरकार में सरकार के मुखिया को वज़ीरे आज़म के नाम से जाना जाता था (आज के मुताबिक चीफ़ मीनिस्टर)।
इसी एक्ट के मुताबिक सन् 1937 में मुल्क में सुबाई सरकारों के लिए एलेक्शन हुए जिसमे बिहार सहित तक़रीबन ज्यादातर सूबों में कांग्रेस भारी अकसरियत से जीती। बाद में गवर्नर के दख़ल व मदाखलत की वजह से कांग्रेस ने बाक़ी सूबों में सरकार बनाने से इनकार कर दिया।
कई हिस्टोरियन के मुताबिक़ व खुदाबख़्श लाइब्रेरी के साबिक डायरेक्टर प्रोफेसर इम्तेयाज़ अहमद के हवाले से कांग्रेस के इनकार के बाद बिहार में मुस्लिम इण्डिपेंडेंट पार्टी की तरफ से मोहम्मद यूनुस ने सरकार बनायी। इनकी सरकार में दो गै़र मुस्लिम वज़ीर भी बने। अप्रैल सन् 1937 को मोहम्मद यूनुस ने बिहार सूबे के वज़ीरे आज़म की ज़िम्मेदारी सम्भाली इस तरह तवारीख के हवाले से पहले वज़ीरे आज़म के ओहदे पर मोहम्मद यूनुस का नाम लिया जाता है।
आप 19 जुलाई सन् 1937 तक ही इस ओहदे पर रहे।
आपकी पैदाइश सन् 1884 में कस्बा पनहरा ;पटनाद्ध में हुई थी। आपके वालिद का नाम मौलवी हसन मुख़्तार जोकि लंदन से वकालत पढ़कर आये थे और मशहूर वकीलों में आपका नाम शुमार होता था।
मोहम्मद यूनुस ने कांग्रेस पार्टी से सियासत में कदम रखा था। जब तक कांग्रेस में रहे हर आंदोलन में हिस्सा लेते रहे जेल भी गये। लेकिन बाद में नज़रियाती इखतलाफ की बिना पर कांग्रेस सेे अलग हो गये थे।
आपने सन् 1937 के एलेक्शन के वक़्त मौलाना सज्जाद के साथ मिलकर मुस्लिम इण्डिपेंडेंट पार्टी बनायी जिससे जीते भी थे।
आज़ादी के बाद आपकी कोशिशों से किसान मज़दूर प्रजा पार्टी बनी थी। आप 13 मई सन् 1952 को इंतक़ाल कर गये।
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