तस्करी के सोने से कर चोरी
मुंबई, 11 जुलाई: कुछ जौहरियों ने कर अधिकारियों और यहां तक कि कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने का नया तरीका निकाला है। इसके जरिये वे न केवल काले धन को सफेद बना रहे हैं बल्कि देश में तस्करी के जरिये आए सोने को भी वैध बना रहे हैं। भारी कराधान और कड़े नियामकीय कानूनों के चलते इन जौहरियों ने यह तरीका ईजाद किया है। सोने पर 3 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और 10 फीसदी आयात शुल्क लगने से पिछले एक साल में इसका अवैध आयात बढ़ा है। जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में देश में तस्करी के जरिये 134.5 टन सोने का आयात किया गया। एक जानकार ने कहा कि इस साल इसके और बढऩे की उम्मीद है।
नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद भी लोग कर चोरी का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। जौहरियों ने कर चोरी का नया तरीका निकाला है। जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआत में जब उपभोक्ता काले धन से गहने खरीदने आए तो जौहरियों ने इस नकदी को लेकर गहने बेचे और अपने खाताबही में यह दिखाया कि उन्होंने पुराने जेवर लेकर नए गहने बेचे हैं। उद्योग के एक जानकार ने बताया कि ऐसे मामलों में अगर बिल बनाया गया तो उसमें केवल गहने बनाने की फीस और इस पर जीएसटी का उल्लेख था। जौहरी हर बिक्री को पुराने गहने के बदले नए गहने का लेनदेन दिखा सकता है। इस तरह से मिली अवैध नकदी का इस्तेमाल तस्करी के जरिये आए सोने की खरीद में किया जाता है। इस तरह तस्करी से आया सोना (जिसका इस्तेमाल पहले ही गहने बनाने में किया जा चुका है) उसके खाताबही में आ जाता है जबकि इससे मिली नकदी का इस्तेमाल अवैध सोने की खरीद के लिए किया जाता है। यह तरीका 2 लाख रुपये से कम की बिक्री पर अपनाया गया जहां खरीदार का पहचानपत्र अनिवार्य नहीं है।
एक अन्य सूत्र ने बताया कि जौहरियों ने तस्करी के जरिये आए सोने को खपाने का एक और तरीका ढूंढ लिया है। जब कोई ग्राहक गहने खरीदने के लिए नकदी लेकर आता है तो जौहरी उसे अवैध सोने से बने गहने बेचता है लेकिन इस बार नया तरीका अपनाया जाता है। इस बार जौहरी दिखाता है कि उसने ग्राहक से पुराना सोना खरीदा है। इस तरह वह अपने अवैध सोने को वैध बना देता है। असल में जौहरी जीएसटी की खामी का फायदा उठा रहे हैं जिसमें ग्राहकों से पुराने गहने खरीदने पर कोई कर नहीं है। जौहरी दिखाता है कि उसने ग्राहक से पुराना सोना खरीदा है और इसके बदले उसे नए गहने बेचे हैं। दोनों तरीकों में यह अंतर है कि नए तरीके में वह पुराने गहने लेकर नए गहनों की बिक्री नहीं दिखा रहा है। बल्कि इसमें वह दो लेनदेन दिखा रहा है। पहला यह कि उसने ग्राहक से पुराने गहने खरीदे हैं और दूसरा यह कि उसने नए गहने बेचे हैं।
इस लेनदेन को 2 लाख रुपये से नीचे रखा जाता है और जरूरत पडऩे ग्राहक के परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर खरीद और बिक्री का बिल बनाया जाता है। इस तरह के मामलों में ग्राहक बड़ा जोखिम उठा रहे हैं। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा, 'जीएसटी कानून की खामियों का फायदा उठाकर देश में तस्करी से आए सोने को ग्राहकों से खरीदा गया बताया जा रहा है क्योंकि पुराने सोने की खरीद पर कोई जीएसटी नहीं है। जब आयकर विभाग अपने डेटा को जीएसटी पोर्टल से जोड़ेगा तो ऐसे ग्राहकों को भारी पूंजी लाभ कर चुकाना पड़ेगा।' उनका अनुमान है कि इस तरीके से 150 टन अवैध सोने को खपाया गया है।
(साभार- बी.एस.)
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