ग़ज़ल (बलजीत सिंह 'बेनाम'): हाँ में हाँ कहने की आदत अब नहीं! ....
लखनऊ: आज 'विशेष' में प्रस्तुत है, हाँसी (हरियाणा) के बलजीत सिंह 'बेनाम' द्वारा रचित - "ग़ज़ल" !
ग़ज़ल:
हाँ में हाँ कहने की आदत अब नहीं!
मुझ पे दुनिया की इनायत अब नहीं!
उम्र के इस दौर को ताक़ीद है!
प्यार करने की इजाज़त अब नहीं!
भर गया है जी मेरा भी आजकल!
उसको भी पहले सी निस्बत अब नहीं!
क्या ज़रूरी ग़ैर की हों साज़िशें!
घर में भी महफूज़ इज़्ज़त अब नहीं!
वक़्त था कल तक शराफ़त का मगर!
इस मुसीबत की ज़रूरत अब नहीं!
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