लखनऊ: करोड़ों कागजों में जले,सैकड़ों मरे....ठंढ भी चली…!
> उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बताई गई बेघरों की 22 हजार संख्या पर यह कहते हुए ऐतराज जताया कि 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश में लगभग 1.82 लाख बेघर हैं | शीर्ष अदालत ने तल्ख लहजे में यहां तक कहा कि ‘आप काम नहीं कर सकते तो कह दें कि आप यह काम करने में सक्षम नहीं हैं.
> बेगैरत अधिकारियों के चलते प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले डेढ़ करोड़ बच्चों को पूरी सर्दी बगैर स्वेटर के बितानी पड़ी है.
> क्या इन बेईमान अधिकारिओं पर कोई कार्यवाही होगी और बदइंतज़ामी की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अपने ऊपर लेंगे ?-
लखनऊ | ठिठुरती रात....सड़क पर सिकुड़ा सिमटा पसरा सन्नाटा...गजब का कोहरा...बिजली के सफेद लट्टू अंधेरे के पार देखने की नाकाम कोशिश करते हुए कोहरे के लपेटे से बचने के फेर में खुद बुझे-बुझे से दिख रहे हैं, दूर-दूर तलक आदमी क्या आवारा कुत्तों का एक फर्द भी नहीं हिलता-डुलता दिख रहा था | न फर्राटा भरते वाहन , न जाम खुलवाने की कवायद करते सिपाही,दरोगा | ठंढ के कहर का गजब ये कि दांत बजना छोड़ होंठों से लहू निकाल लेने पर बजिद | न डायल 100 की लाल बत्ती वाली चमचमाती काली वाली मोटर,न सीटी बजाते गश्ती सिपाही और न कहीं जलता सरकारी अलाव | स्टेशन रोड से हजरतगंज और हुसैनगंज से बांसमंडी,कसाईबाड़ा,हीवेट रोड तिराहा,श्रीराम रोड तिराहा से कैसरबाग से ओडियन चौराहे से बर्लिंगटन चौराहे तक ‘प्रियंका’ टीम ने कहीं भी जलता हुआ एक भी अलाव नहीं देखा | दूसरी सुबह इन्हीं इलाकों के कई दुकानदारों से, रिक्शेवालों से,पटरी पर ठेला-खोमचे वालों से सरकारी अलाव जलने के बारे में दरयाफ्त किया गया तो हर किसी का जबाब एक जैसा था ‘अभी तक तो नहीं देखा’ | गौरतलब है कि इन बयानों से इतर इस पूरे इलाके में जले हुए अलावों की राख भी नहीं दिखी, ये अलग बात है कि सफाईकर्मी मुंह अंधेरे जलती हुई लकड़ी,कोयला,राख उठा ले जाने का प्रशिक्षण प्राप्त हों !
सरकारी अधिकारियों के दावे के मुताबिक अलाव व कंबल के लिए 30 करोड़ से अधिक की धनराशि प्रदेश के सभी जिलों को दी जा चुकी है | वहीं लखनऊ नगर निगम के आला साहबों की माने तो 19 दिसम्बर से 18 जनवरी तक 5 करोड़ रुपयों से अधिक की लकड़ी अकेले राजधानी के चौराहों पर जलाई जा चुकी है | उस पर तुर्रा ये कि अलाव जलाने की लकड़ी 800 रूपये क्विंटल वन निगम से खरीदी गई | मजे की बात है कि जिस जोन एक में सबसे अधिक अलाव जलाने का दावा किया जा रहा है उसी वीवीआईपी इलाके में ‘प्रियंका’ टीम ने ठिठुरती रात में 1 बजे से 4 बजे सुबह तक अलाव तलाश किये | और जिन सुरक्षा कर्मियों की दुहाई दी जा रही है उनकी छाया तक सड़कों पर कहीं नहीं दिखी | यहां गौर करने लायक है कि अगर पुलिस के सिपाही रात में जोन एक में गश्त कर रहे होते और चौराहों पर अलाव रौशन होते तो क्या वीआइपी इलाके की सड़कों पर मुख्यमंत्री आवास,राज्यपाल आवास के सामने और 1090 चौराहे पर टनों आलू फेंका जा सकता था ?
इससे बदतर हालात रैन बसेरों के रहे , वह भी तब जब मुख्यमंत्री खुद ठंढी रात के अंधेरे में रैन बसेरों के इंतजाम देखने गये थे और जिलाधिकारियों को आकस्मिक निरीक्षण करने के आदेश दिए थे | बदइन्तजामी का आलम ये कि कहीं आधार्कार्ड, तो कहीं पैसों की मांग , इसी वजह से उच्चतम न्यायालय को कहना पड़ा कि नाकाम हो गई है आपकी मशीनरी | उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बताई गई बेघरों की 22 हजार संख्या पर यह कहते हुए ऐतराज जताया कि 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश में लगभग 1.82 लाख बेघर हैं | शीर्ष अदालत ने तल्ख लहजे में यहां तक कहा कि ‘आप काम नहीं कर सकते तो कह दें कि आप यह काम करने में सक्षम नहीं हैं | बावजूद इतनी लानत-मलामत के बेशर्म अधिकारीयों ने 18 दिसम्बर,17 से 12 जनवरी,18 तक 35,443 शहरी गरीबों के रैन बसेरों में आश्रय लेने के आंकड़े अख़बारों में छपवा दिए | जबकि हकीकत में इसी दौरान फुटपाथों से लेकर घरों के भीतर मरने वालों की संख्या लगभग एक हजार आंकी गई है | वहीं अस्पतालों में सर्दी से बीमारों की संख्या लाखों में रही | इन संख्याओ को छिपाने के लिए लेखपाल से लेकर आला अधिकारीयों तक ने ठंढ से मरने वाले के परिजनों से जबरन सादे कागजों पर अंगूठे लगवा कर उस पर बीमारी से मौत होना दर्शाने का कारनामा कर दिखाया है | इन्हीं बेगैरत अधिकारियों के चलते प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले डेढ़ करोड़ बच्चों को पूरी सर्दी बगैर स्वेटर के बितानी पड़ी है |
ठंडी के कहर भरे आलम में जहां बिजली की मांग बढ़ी, वहीं अकेले लखनऊ में 6 करोड़ से अधिक के ब्लोअर,हीटर अब तक बिक गये हैं , बिजली के कारोबारियों के मुताबिक तीन-चार साल पुराना स्टाक तक बिक गया | ऐसे में इन झूठे और संगदिल अफसरानों पर कोई कार्रवाई होगी ?
ठंडी के कहर भरे आलम में जहां बिजली की मांग बढ़ी, वहीं अकेले लखनऊ में 6 करोड़ से अधिक के ब्लोअर,हीटर अब तक बिक गये हैं , बिजली के कारोबारियों के मुताबिक तीन-चार साल पुराना स्टाक तक बिक गया | ऐसे में इन झूठे और संगदिल अफसरानों पर कोई कार्रवाई होगी ?
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