गांधी जयंती एवं स्वतंत्रता अभियान: आधुनिक युग में विनाश !
लखनऊ: फ्रीलांस राइटर, कॉलमिस्ट और युवा एसोसिएट - सुनील कुमार महला ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिवस 02 अक्टूबर 2026 के अवसर पर एक विशेष प्रस्तुति में कहा कि:
2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के रूप में मनाया जाता है।
वास्तव में इस दिन केवल और केवल एक महान नेता के जन्म का ही स्मरण मात्र नहीं है, बल्कि यह उन विचारों को पुनः जीवित करने का अवसर है, जो भारत स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक स्वतंत्रता को एक नई दिशा देते हैं।
गाँधी जी की स्वतन्त्रता के विषय में यह सम्पादन था कि-
'स्वतंत्रता ईश्वरभक्ति के बाद दूसरे स्थान पर है।' यह कथन कि गांधी जी स्वतंत्रता को केवल शारीरिक या बाह्य अभिकथन तक सीमित नहीं मानते थे, बल्कि इसमें आत्म-शुद्धि, नैतिक बल और ईश्वर भक्ति से आबंटन शामिल थे। सच तो यह है कि स्वच्छता केवल आदत नहीं है, राष्ट्र की प्रगति का आधार है और स्वच्छ वातावरण, स्वस्थ नागरिक और समाज का निर्माण है। जहां स्वच्छता है, वहां स्वास्थ्य, पर्यटन और विकास को गति मिलती है। हर नागरिक का छोटा-स्वतंत्रता प्रयास देश की बड़ी तस्वीर बदल सकता है। स्वच्छ सोच, स्वच्छ व्यवहार और स्वच्छ वातावरण से ही विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है।
स्वच्छ भारत अभियान एक जन-आंदोलन:-
पाठकों को पता होगा कि स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर हुई थी और इस अभियान का उद्देश्य देश में शौच से मुक्ति और स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता लाना है। इसके तहत घर-घर शौचालय निर्माण और सॉलिड-टारल कचरा प्रबंधन पर जोर दिया गया। असल में यह स्वच्छ भारत अभियान ही था, जिसके तहत भारतीय प्लास्टिक और शहरों में स्वच्छता के उत्पादों को मजबूत किया गया था। इस काबिले-तारीफ में कहा गया है कि आज ओ छूट (खुले में शौच से मुक्ति) के बाद अब ओ एफएलसी के माध्यम से ठोस और तरल पदार्थ उद्योग प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि स्वच्छता से स्वास्थ्य, पर्यावरण, सम्मान और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है और स्वच्छ भारत केवल एक अभियान नहीं है, बल्कि स्वच्छ और स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण का जनआंदोलन है।
गांधी जी का स्वतंत्रता दर्शन और आज के युग में प्रासंगिकता:-
गांधी जी का विश्वास था कि एक स्वच्छ समाज ही एक स्वस्थ और स्वावलंबी राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। गांधी जी का मानना था कि स्वच्छता किसी विशेष वर्ग या जाति का काम नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक का नैतिक और परम कर्तव्य है। सरल शब्दों में कहा गया है कि उनका यह मानना था कि बाहरी कूड़ा-कचरा की सफाई जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी मन की बुरी चीजें भी हैं- जैसे घृणा, बेरोजगारी और कूड़ा-करकट की सफाई भी जरूरी है। असल में, गांधी जी ने अपने आस-पास के वातावरण की साफ-सफाई को नैतिक जिम्मेदारी दी थी और आश्रम में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए इसे अनिवार्य रूप से खत्म कर दिया था। आज हम सभी इक्कीसवीं सदी में शांति ले रहे हैं और इस समय पूरी दुनिया में शहरी गति, औद्योगिक विकास, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी योजनाओं का सामना कर रहे हैं, ऐसे में गांधी जी के विचार और स्वतंत्रता अभियान की कमी और अधिक बढ़ गई है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आज के समय में प्लास्टिक कचरा, ई-कचरा और औद्योगिक प्रदूषण गंभीर और बड़ी समस्या बन गए हैं। स्वतंत्रता अभियान अब केवल पर्यावरण परामर्श सहमति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह कचरा प्रबंधन (वेस्ट रबर), रीसाइक्लिंग और संरक्षण का पर्याय बन गया है। देश की प्रगति और प्रगति के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना बहुत जरूरी है और यह तभी संभव है जब देश में हर तरफ स्वच्छता हो। गंदगी कई शर्ते का मूल कारण है।
वास्तव में, स्वच्छता से जल जनित और वैज्ञानिक में भारी कमी आती है, जिससे स्वच्छता से स्वास्थ्य सुधार होता है और चिकित्सा पर होने वाले खर्च में बचत होती है। एक स्वस्थ कार्यबल राष्ट्र के आर्थिक विकास में लगातार योगदान देता है। आज संयुक्त राष्ट्र के 'सतत विकास लक्ष्य' (जैसे स्वच्छ जल, स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य) को प्राप्त करने के लिए स्वतंत्रता अभियान एक मजबूत स्तंभ संकल्प बन रहा है।
स्वच्छ भारत, विकसित भारत:-
वर्ष 2026 तक स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और ग्रामीण चरण-2 के माध्यम से देश को पूरी तरह से कचरा-मुक्त और टिकाऊ स्वच्छ बनाने के लक्ष्य पर तेज गति से कार्य जारी है। इस वर्ष 'स्वच्छता ही सेवा 2026' अभियान को 'स्वच्छता में सहयोग'; स्वच्छ भारत, विकसित भारत की राष्ट्रीय सहयोग थीम का आयोजन किया गया है। आँकड़े हैं कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में 95% से अधिक ने ओ फ़ोकस (खुले में शौच मुक्त के साथ) का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
वास्तव में यहां यह कहा गया है कि दोष यह नहीं है कि स्वच्छ भारत मिशन अब केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में समग्र स्वतंत्रता और कचरा प्रबंधन का व्यापक अभियान बन गया है। वर्ष 2026-27 में स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के लिए ₹7,192 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। इसके तहत 48,096 ब्लॉकों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, 36,119 ब्लॉकों में ग्रे-वोटर प्रबंधन और 1,352 ब्लॉकों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाइयों का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 1.50 लाख जिला में फ़िकल स्लज प्रबंधन की व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है।
अगस्त 2025 तक 4.77 लाख से अधिक गांव ओ फाइनैंशल मॉडल घोषित किये जा चुके थे। इतना ही नहीं, शहरों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और वैज्ञानिक तरीकों से ठोस अपशिष्ट पदार्थों की दर 75% से अधिक हो गई है। इस मिशन के अंतर्गत स्वतंत्रता ऐप के माध्यम से अब तक 2 करोड़ से अधिक जन संपर्क समाधान भी दर्ज किए जा चुके हैं। यह अभियान केवल सरकारी अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, जनभागीदारी, रीसायकल और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े एक राष्ट्रीय व्यवहारिक बदलाव में बदलाव किया गया है। ये सभी दस्तावेज हैं कि स्वच्छ भारत मिशन का अगला चरण स्वतंत्रता के साथ-साथ युवाओं के साइंटिस्ट और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित है।
अंत में निष्कर्ष के रूप में स्पष्ट रूप से यही विशेषता है कि स्वच्छ भारत अभियान केवल और केवल एक अभियान की मात्रा नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली है। आज गांधी जयंती के अवसर पर हमें यह कहना होगा कि स्वतंत्रता कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक दैनिक जीवन शैली है। यदि हम वास्तव में गांधी जी को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो हमें स्वतंत्रता को अपने आचरण में ढालना होगा। हमें देश के नागरिकों के गुणों के लिए यह चाहिए कि हम केवल अपने आस-पास के माहौल को साफ रखें बल्कि इसके लिए दस्तावेजों को भी प्रेरित और मान्यता दें। आज प्लास्टिक क्लीन भारत की सबसे बड़ी बाधा है। असल, प्लास्टिक नाल, नदियाँ और मिट्टी से मिलकर पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। इसलिए एकल-उपयोग प्लास्टिक पर रोक के साथ-साथ जिम्मेदार सौरव की आवश्यकता महत्ती है। हमें यह चाहिए कि हम प्लास्टिक छोड़ें और स्वच्छता को अपनाएं। एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक (सिंगल यूज प्लास्टिक) का बहिष्कार करें। गिले और किशोर किशोरों को अलग-अलग करने की आदत। हमें यह बात अपने जहां में रखनी चाहिए कि जब तक नागरिक हर स्वतंत्रता को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक एक पूर्णतः स्वच्छ और समृद्ध भारत का सपना अधूरा रहेगा। बाबूलाल के इस विचार को जीवंत बनाए रखना आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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