DRDO से विकसित सभी मिसाइल तकनीक का निजीकरण देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा : समतामूलक समाज निर्माण मोर्चा
लखनऊ (उत्तर प्रदेश, भारत): समतामूलक समाज निर्माण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सच्चिदानन्द श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार द्वारा निजी कंपनियों को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।
उन्होंने इसे देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
श्री श्रीवास्तव ने कहा कि, वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव द्वारा नई आर्थिक नीति के अंतर्गत विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के दबाव में 20 टन सोना यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड और 47 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड व बैंक ऑफ जापान में गिरवी रखा गया था। उस समय भारत को आर्थिक रूप से गुलाम बनाने की जो नींव डाली गई थी, उसे वर्तमान मोदी सरकार ने पूरी तरह आर्थिक गुलामी में बदलकर पूरा कर दिया है। इसी के परिणामस्वरूप आज पूरे देश में बेरोजगारी और अराजकता का साम्राज्य फैल गया है।
उन्होंने आगे कहा कि, अब मोदी सरकार द्वारा निजी कंपनियों को DRDO की पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तकनीक सौंपना और रक्षा उद्योग का निजीकरण करना बेहद चिंताजनक है। यह निर्णय भारत की आंतरिक व बाहरी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है और देश को आर्थिक गुलामी की जंजीरों में और अधिक जकड़ने जैसा है। समतामूलक समाज निर्माण मोर्चा इस जनविरोधी निर्णय का पुरजोर विरोध करता है।
मोर्चा देश के समस्त नागरिकों का आह्वान करता है कि, वे देश को इस आर्थिक गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए आगे आएं। टैक्स व अन्य माध्यमों से देशवासियों को लूटने वाले आर्थिक तत्वों के खिलाफ खड़े हों और बेरोजगारी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक 'महापरिवर्तन का संकल्प' लें।
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