भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा *विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एसएंडटी) क्लस्टर वार्षिक रिपोर्ट 2025-2026* लॉन्च

लॉन्च के दौरान, प्रोफेसर सूद ने अलग-अलग क्लस्टर्स के बीच बेहतर सहयोग, इंडस्ट्री के साथ जुड़ाव और टेक्नोलॉजी को असल इस्तेमाल में लाने पर जोर दिया। उन्होंने सफल क्षेत्रीय समाधानों को अपनाने और बड़े स्तर पर लागू करने, तथा बेहतर टीआरएल(टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल), वास्तविक दुनिया में परीक्षण, व्यावसायीकरण और सामाजिक व आर्थिक प्रभाव के आधार पर परिणामों को मापने पर भी ध्यान केंद्रित किया।
डॉ. मैनी ने कंसोर्टियम-आधारित मॉडल के माध्यम से एसएंडटी (विज्ञान और प्रौद्योगिकी) क्लस्टर्स की बढ़ती परिपक्वता पर प्रकाश डाला और टेक्नोलॉजी के वैलिडेशन और ट्रांसलेशन में उद्योग की भागीदारी को मजबूत करते हुए राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रिपोर्ट में क्षेत्रीय इनोवेशन इकोसिस्टम और "नेशनल टेक्नोलॉजी एक्सेलेरेटर" के रूप में विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर्स की विकसित होती भूमिका पर प्रकाश डाला गया है, जो साझा इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), स्टार्टअप सहायता और उद्योग सहभागिता के माध्यम से टेक्नोलॉजी को असल इस्तेमाल तक पहुँचाने का काम करते हैं। अनुसंधान और पायलट परीक्षण से आगे बढ़कर कई पहलें फील्ड डिप्लॉयमेंट और व्यावसायीकरण के चरण तक पहुँच चुकी हैं। इनमें ई-यंत्रम (E-Yantram), एआई-सक्षम डिजिटल पोडियाट्र्री क्लिनिक, एआई-सक्षम कृषि और मौसम इंटेलिजेंस, देश में बने पेसमेकर के पार्ट्स, रोगी-विशिष्ट 3डी-प्रिंटेड इम्प्लांट्स, केमअमेज और वन हेल्थ पहल शामिल हैं, साथ ही Kalaanubhav.in और i-Passport जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म भी इसके तहत आते हैं। रिपोर्ट में क्लस्टर्स की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें दिसंबर 2025 में आयोजित एसएंडटी क्लस्टर्स का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शामिल है। इस सम्मेलन में 35 से अधिक देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था और 12 अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। इसके बाद स्वास्थ्य, उभरती प्रौद्योगिकियों और नेट-जीरो तकनीकों जैसे क्षेत्रों में वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी, इंडिया-ऑस्ट्रेलिया स्मार्ट फार्म नेटवर्क और यूके कैटापुल्ट नेटवर्क के साथ सहयोग किया गया है।

एसएंडटी (विज्ञान और प्रौद्योगिकी) क्लस्टर्स ने अपने चल रहे अंतरराष्ट्रीय सहयोगों को भी प्रस्तुत किया, जो स्वास्थ्य सेवा, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्मार्ट कृषि, सस्टेनेबल मोबिलिटी, क्लाइमेट रेजिस्टेंस, उभरती प्रौद्योगिकियों और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में हैं। अंतर-क्लस्टर सहयोग के कारण सफल समाधानों को दोहराना और उनका विस्तार करना संभव हो पाया है। उदाहरण के लिए, डिजिटल पोडियाट्र्री क्लिनिक का विस्तार BeST से PI-RAHI तक हुआ है; JCKIC की एक पहल Kalaanubhav.in को विभिन्न क्लस्टर्स में विस्तारित किया जा रहा है और I-STEM का एक कार्यक्रम I-RISE, एसएंडटी क्लस्टर्स के माध्यम से एडवांस्ड साइंटिफिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच को मजबूत कर रहा है। AMTZ की i-Passport पहल पर भी राष्ट्रीय स्तर पर इसके विस्तार के लिए विचार किया जा रहा है, जो नवप्रवर्तकों को शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, टेस्टिंग, मेंटरशिप, रेगुलेटरी सपोर्ट और उद्योग नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करती है।
इस रिपोर्ट को https://www.psa.gov.in/CMS/web/sites/default/files/2026-08/S%26T%20Clusters%20Annual%20Report%202025-26.pdf पर देखा जा सकता है।
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