शिक्षा मंत्रालय (आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में): उच्च शिक्षा ऋण के लिए पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल
नई दिल्ली (PIB): भारत सरकार ने नवंबर 2024 में पीएम-विद्यालक्ष्मी नामक नई केंद्रीय क्षेत्र की योजना शुरू की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विद्यार्थी को वित्तीय बाधाओं के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर से वंचित न होना पड़े।
इस योजना के अंतर्गत, जिन विद्यार्थियों को शीर्ष गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षा संस्थानों (क्यूएचईआई) में योग्यता के आधार पर प्रवेश मिलता है और जो शिक्षा ऋण लेना चाहते हैं उन सभी विद्यार्थियों को बिना किसी जमानत और बिना किसी गारंटर के शिक्षा ऋण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा, जिन छात्रों की वार्षिक पारिवारिक आय 8 लाख रुपये तक है उनके लिए इस योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 3% ब्याज सब्सिडी भी प्रदान की जाती है।
प्रत्येक वर्ष ऐसे 1 लाख तक नए छात्र जो शिक्षा ऋण पर किसी अन्य छात्रवृत्ति या ब्याज सब्सिडी का लाभ नहीं उठा रहे हैं, वे इस ब्याज सब्सिडी सुविधा के पात्र हैं। 2024-25 से 2030-31 की अवधि के दौरान 7 लाख तक नए छात्रों को 3% ब्याज सब्सिडी का लाभ देने के लिए 3,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
एक समर्पित ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म, पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल https://pmvidyalaxmi.co.in शुरू किया गया है, जो 25 फरवरी 2025 से क्रियाशील है, जिस पर विद्यार्थी एक आसान आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से शिक्षा ऋण एवं ब्याज सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसे सभी बैंक उपयोग कर सकते हैं। 06 नवंबर, 2024 को अपनी शुरुआत से लेकर 21 जुलाई, 2026 तक, इस योजना के अंतर्गत बिना जमानत और बिना गारंटर वाले 1,12,817 पीएम विद्यालक्ष्मी शिक्षा ऋण स्वीकृत किए गए हैं और स्वीकृत राशि 15,634.78 करोड़ रुपये है।
इसके अलावा, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा ऋण के लिए 'पीएम उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन क्रेडिट गारंटी फंड योजना' (पीएम-यूएसपी सीजीएफएसईएल) लागू किया जा रहा है। सीजीएफएसईएल के अंतर्गत, केंद्र सरकार विद्यार्थियों द्वारा लिए गए शिक्षा ऋण के लिए गारंटी देती है, जिसके लिए किसी जमानत या तीसरे पक्ष की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती है; यह सुविधा अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक के ऋण के लिए उपलब्ध है। यह योजना, डिफ़ॉल्ट की स्थिति में, ऋण राशि के 75% तक गारंटी कवरेज प्रदान करती है। 2015 में योजना शुरू होने से लेकर 21 जुलाई, 2026 तक, 59,843.74 करोड़ रुपये की राशि के लिए 14,65,880 क्रेडिट गारंटी जारी की गई हैं।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल पात्र विद्यार्थी ही ब्याज सब्सिडी का लाभ प्राप्त करें, आधार आधारित दोहराव (डी-डुप्लीकेशन) किया जाता है। एक बार जब ब्याज सब्सिडी के लिए आवेदन मंजूर हो जाता है, तो विद्यार्थी को पंजीकृत मोबाइल पर पीएम-विद्यालक्ष्मी डिजिटल रुपया ऐप इंस्टॉल करने के लिए एक एसएमएस संदेश मिलता है। बैंकों से दावा प्राप्त होने पर, ब्याज सब्सिडी की राशि सरकार द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी के डिजिटल वॉलेट में जमा कर दी जाती है। जब विद्यार्थी रिडेम्प्शन का विकल्प चुनता है, तो ब्याज सब्सिडी की राशि सीधे उसके शिक्षा ऋण खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से जमा हो जाती है।
इसके अलावा, योजना के अंतर्गत दूसरे वर्ष से ब्याज सब्सिडी जारी होना विद्यार्थियों के संतोषजनक शैक्षणिक प्रदर्शन पर निर्भर करता है। पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर पंजीकृत/ऑनबोर्ड किए गए किए गए क्यूएचईआई के लिए पोर्टल पर विद्यार्थियों का सेमेस्टर-वार प्रगति रिपोर्ट अपलोड करने की सुविधा उपलब्ध है ताकि उनके प्रदर्शन की निगरानी की जा सके।
यह योजना सभी अनुसूचित बैंक/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक/सहकारी बैंकों के लिए लागू है। वर्तमान में, पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, 20 निजी बैंक, 25 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और 7 सहकारी बैंक शामिल हैं, ताकि पात्र विद्यार्थियों, जिनमें ग्रामीण, जनजातीय एवं वंचित क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थी भी शामिल हैं, को पीएम विद्यालक्ष्मी का लाभ प्राप्त हो सके।
छात्रवृत्ति एवं शिक्षा ऋण मिलकर मेधावी एवं योग्य छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद करते हैं, जिससे ड्रॉपआउट दर में कमी आती है। इसके परिणामस्वरूप, उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2013-14 में 23.0 से बढ़कर 2023-24 में 30.0 हो गया है।
यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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