'तीसरी बेगम’ में दिखा महिला शक्ति का असरदार चेहरा
के सी बोकाडिया की ‘तीसरी बेगम’: "रिश्तों, धोखे और आत्मसम्मान की दमदार दास्तान”
मुंबई (अनिल 'बेदाग'): हिंदी सिनेमा में सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में हमेशा दर्शकों के दिल को छूती रही हैं और अनुभवी निर्माता-निर्देशक के सी बोकाडिया की नई फिल्म ‘तीसरी बेगम’ इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। तेरी मेहरबानियाँ, प्यार झुकता नहीं और आज का अर्जुन जैसी यादगार फिल्में देने वाले बोकाडिया इस बार महिला सशक्तिकरण और बहुविवाह जैसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दे को बड़े प्रभावशाली अंदाज़ में पर्दे पर लेकर आए हैं।
फिल्म की कहानी पूजा दीक्षित नाम की एक मासूम युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शादी धोखे से बब्बन खान से हो जाती है। शादी के बाद उसका नाम बदलकर नगमा रख दिया जाता है और उसे पता चलता है कि उसके पति की पहले से दो पत्नियां हैं। यहीं से शुरू होती है आत्मसम्मान, संघर्ष और अन्याय के खिलाफ लड़ाई। कहानी तब और दिलचस्प हो जाती है जब तीनों महिलाएं मिलकर अपने अत्याचारी पति के खिलाफ खड़ी होती हैं।
मुग्धा गोडसे, कायनात अरोड़ा और जरीना वहाब ने अपने अभिनय से फिल्म को भावनात्मक गहराई दी है। लखनऊ और बनारस की वास्तविक लोकेशनों पर शूट हुई यह फिल्म दर्शकों को एक सशक्त सामाजिक संदेश देने में सफल रहती है।
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