लाइव लॉ: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के विलय की योजना को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट में खारिज
नई-दिल्ली (लाइव लॉ): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग की उन सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को विलय करने की योजना को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें 50 से कम रजिस्टर्ड स्टूडेंट हैं।
जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने शिक्षा प्रणाली को "अधिक कार्यात्मक और व्यवहार्य" बनाने के लिए पात्र विद्यालयों को निकटवर्ती शैक्षणिक सुविधाओं के साथ 'जोड़ने' के राज्य सरकार का निर्णय बरकरार रखा।
सीतापुर के कुल 51 स्टूडेंट्स ने अपने अभिभावकों के माध्यम से राज्य सरकार के 16 जून के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें कहा गया था कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 21ए का उल्लंघन करता है।
उनका तर्क था कि, यह निर्णय उन बच्चों के हितों के लिए हानिकारक होगा, जिन्हें अपने नए विद्यालयों तक पहुंचने के लिए अधिक दूरी तय करनी होगी।
याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व सीनियर एडवोकेट एल.पी. मिश्रा और एडवोकेट गौरव मेहरोत्रा ने किया।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अपने निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा कि, यह कदम स्टूडेंट्स के व्यापक हित में है। इससे संसाधनों के बेहतर उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। पीठ को बताया गया कि, शिक्षा विभाग का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, ड्रॉपआउट दर को कम करना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है, जो कम नामांकन वाले स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों के दुरुपयोग की समस्या से निपटने के लिए आवश्यक माना जाता है।
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