॥ धर्म-रक्षा हेतु विशेष शंकराचार्य-संदेश ॥
लखनऊ: 'परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ ने, "॥ धर्म-रक्षा हेतु विशेष शंकराचार्य-संदेश ॥" जारी किया।
॥ धर्म-रक्षा हेतु विशेष शंकराचार्य-संदेश ॥
नारायण!
संवत् 2083 विक्रमी के इस वासन्तिक चैत्र नवरात्र व्रत की आज मंगलमयी सम्पन्नता हुई है। शक्ति की इस नौ दिवसीय आराधना के उपरान्त आज दशावतार दशमी की पावन तिथि है।
इस अवसर पर हम समस्त सनातनी जनता को एक विशेष सन्देश देना चाहते हैं, जिसे हम चाहते हैं कि आप अपने धर्म की रक्षा के लिए घर-घर तक पहुँचाएँ।
सनातनी बंधुओं,
आज हमारे हिंदू धर्म के विरुद्ध प्रायोजित रूप से अनेक प्रहार किए जा रहे हैं। राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में हिंदू मतदाता ऐसी पार्टियों को वोट देने को मजबूर है, जो सत्ता में आकर सीधे तौर पर या परोक्ष रूप से गोहत्या करवा रही हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस महापाप का आंशिक हिस्सा उस मतदाता को भी लगता है, जिसकी चुनी हुई सत्ता यह कुकृत्य करती है।
इतना ही नहीं, आज सुनियोजित ढंग से धर्म को क्षति पहुँचाने वाले कानून बनाए जा रहे हैं। हमारी पवित्र संस्कृति को बिगाड़ने वाला दूषित वातावरण तैयार किया गया है और हमें अपने ही देश में धार्मिक शिक्षा के समुचित अवसरों से वंचित रखा गया है। अत्यंत चिंता का विषय यह है कि हमारे खान-पान और दैनिक उपयोग की वस्तुओं में मिलावट के साथ-साथ अभक्ष्य (न खाने योग्य अपवित्र पदार्थ) मिलवाकर सनातनी समाज का धर्म नष्ट करने का कुचक्र चल रहा है।
हमारा संकल्प और आपका दायित्व:
आपके—जन-जन के ‘शंकराचार्य' के रूप में हम अपने सनातन धर्म की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। इन सभी विसंगतियों और षड्यंत्रों के विरुद्ध हम निरंतर आवाज उठा रहे हैं और इनके सुधार के लिए संघर्षरत हैं।
किंतु, यह धर्म-रक्षा तभी संभव है जब आप सब जन-जन इससे जुड़ेंगे। हम आह्वान करते हैं कि आप इस धर्म-यज्ञ में तन, मन और धन से हमारा साथ दें और पूर्ण सहयोग करें। आज यदि हम सजग होकर एकजुट नहीं हुए, तो हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य और संस्कार सुरक्षित नहीं रहेगा।
इस पावन दशमी तिथि पर संकल्प लें कि हम अपने अस्तित्व, अपनी गौ-माता और अपने सनातन धर्म के हर प्रतीक की रक्षा के लिए इस चेतना को प्रत्येक हिंदू के हृदय तक पहुँचाएंगे।
हमारा यह आशीर्वाद और संदेश लेकर हमारे ‘शंकराचार्य संदेष्टा’ या ‘धर्मदूत’ आपके घर आ रहे हैं। उनसे हमारा संदेश लीजिये और यदि आप हम तक अपना कोई संदेश भिजवाना चाहते हैं, तो वे लिखकर उन्हें दीजिये ताकि वे आपका सन्देश हम तक पहुँचा सकें।
काशी से आप सभी के लिए मंगल आशीष।
नारायण स्मरण सहित,
'परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’
*****






10.jpg)
![अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस- 01मई 2018: मजदूरों का शोषण - मानवता का उपहास - [रेल सेवक संघ]](http://www.swatantrabharatnews.com/uploads/images/10985359_750498361715733_4743675663368666332_n.jpg)
15.jpg)