संघर्ष / आंदोलन के माध्यम से ही वेतनबोर्ड और पेंशन आदि के अधिकार को लेकर अपनी गरिमा, सुरक्षा और एक साझा भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं: सच्चिदानन्द श्रीवास्तव
भारतीय रेल में आजादी के 79 वर्ष उपरान्त भी कार्यस्थल (WORK - PLACE) पर लोकतंत्र स्थापित न हो सका, न ही WAGE BOARD गठित हो सका और तो और पेंशन भी सामप्त: सच्चिदानन्द श्रीवास्तव, महामंत्री - रेल सेवक संघ (रजिस्टर्ड)
'पेंशन' कोई स्कीम नहीं और न ही कोई खैरात थी बल्कि, 'कर्मचारी' द्वारा 18 वर्ष की युवा अवस्था से लेकर 60 वर्ष तक "निजी क्षेत्र की तुलना में सरकारी क्षेत्र में कम वेतन मिलने पर भी" देश को राष्ट्र की सेवा भावना से शारीरिक व मानसिक रूप से पूर्ण रूपेण सेवा समर्पित करने के कारण क्षतिपूर्ति के रूप में "सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बुढ़ापे में आर्थिक रूप से सुरक्षा प्रदान करने और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रदान किया जाता था": सच्चिदानन्द श्रीवास्तव, महामंत्री - रेल सेवक संघ (रजिस्टर्ड)
लखनऊ: 'भारतीय रेल' में केवल 'वर्कमैन' की एकमात्र यूनियन "रेल सेवक संघ (रजिस्टर्ड)" है जो संघर्ष / आंदोलन के माध्यम से वेतनबोर्ड और पेंशन आदि के अधिकार को लेकर अपनी गरिमा, सुरक्षा और एक साझा भविष्य सुनिश्चित करने का प्रयास लगातार कर रही है।
रेल सेवक संघ के महामंत्री - सच्चिदानन्द श्रीवास्तव ने "केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच" की ओर से भारत सरकार की मजदूर और किसान बिरोधी नीतियों के खिलाफ 12 फ़रवरी 2026 को की गयी "एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को समर्थन देते हुए
"इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन ( @ilo ), राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू (@Droupati_Murmu ), राष्ट्रपति ( @rashtrapatibhvn ), प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ( @narendramodi ), प्रधानमंत्री ( @PMOIndia ), श्रम मंत्रालय ( @LabourMinistry ), रेल मंत्रालय ( @RailMinIndia ), आम आदमी पार्टी ( @AamAadmiParty ) और राज्य सभा सांसद- साथी संजय सिंह ( @SanjayAzadSln )" को
सम्बंधित फोटो के साथ एक्स X पर पोस्ट किया, जिसमें रेल सेवक संघ के महामंत्री - सच्चिदानन्द श्रीवास्तव ने कहा कि, "*संघर्ष / आंदोलन के माध्यम से ही वेतनबोर्ड (WAGE BOARD) और पेंशन आदि के अधिकार को लेकर अपनी गरिमा, सुरक्षा और एक साझा भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं !
उन्होंने एक्स X पर किये गए पोस्ट में कहा कि:
और तो और पेंशन भी समाप्त कर दिया गया।
('पेंशन' कोई स्कीम नहीं और न ही कोई खैरात थी बल्कि, 'कर्मचारी' द्वारा 18 वर्ष की युवा अवस्था से लेकर 60 वर्ष तक "निजी क्षेत्र की तुलना में सरकारी क्षेत्र में कम वेतन मिलने पर भी" देश को राष्ट्र की सेवा भावना से शारीरिक व मानसिक रूप से पूर्ण रूपेण सेवा समर्पित करने के कारण क्षतिपूर्ति के रूप में "सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बुढ़ापे में आर्थिक रूप से सुरक्षा प्रदान करने और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रदान किया जाता था।)
रेल सेवक संघ (रजिस्टर्ड) के महामंत्री - सच्चिदानन्द श्रीवास्तव ने एक्स X पर किये गए पोस्ट में यह भी कहा कि:
*संघर्ष / आंदोलन जारी है!
भारतीय रेलवे का वर्कमैन (WORKMAN), कार्यस्थल (WORK - PLACE) पर लोकतंत्र स्थापित करने के लिए लगातार संघर्ष / आंदोलन जारी रखेगा!
क्योंकि संघर्ष / आंदोलन के माध्यम से भारतीय रेलवे के वर्कमैन (WORKMEN), वेतनबोर्ड (WAGE BOARD) गठित कराकर कार्य के अनुरूप अपना सही वेतन और रिटायर होने के उपरान्त 'पेंशन' आदि के अधिकार को लेकर अपनी गरिमा, सुरक्षा और एक साझा भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
@ilo @Droupati_Murmu @rashtrapatibhvn @narendramodi @PMOIndia @LabourMinistry @RailMinIndia @AamAadmiParty @SanjayAzadSln
— RAIL SEWAK SANGH (REG.)- TRADE UNION OF 'WORKMAN'. (@railsewaksangh) February 12, 2026
1.
भारतीय रेल में आजादी के 79 वर्ष उपरान्त भी कार्यस्थल (WORK - PLACE) पर लोकतंत्र स्थापित न हो सका,
(Contd...2.) pic.twitter.com/ZWXlb2AhkQ
2.
— RAIL SEWAK SANGH (REG.)- TRADE UNION OF 'WORKMAN'. (@railsewaksangh) February 12, 2026
न ही वर्कमैन (WORKMAN) की यूनियन को मान्यता देने का प्रावधान हो सका
और
न ही देश का सबसे बड़ी औद्योगिक संस्थान होने के उपरांत भी कर्मकारों के वेतन के लिए अन्य उद्द्योगों की तरह WAGE BOARD गठित हो सका।
और तो और पेंशन भी समाप्त कर दिया गया।
*संघर्ष / आंदोलन जारी है!
(Contd...3.) pic.twitter.com/MRw40UMoxE
3.
— RAIL SEWAK SANGH (REG.)- TRADE UNION OF 'WORKMAN'. (@railsewaksangh) February 12, 2026
**भारतीय रेलवे का वर्कमैन (WORKMAN), कार्यस्थल (WORK - PLACE) पर लोकतंत्र स्थापित करने के लिए लगातार संघर्ष / आंदोलन जारी रखेगा! pic.twitter.com/2gnSPSk9Yv
4.
— RAIL SEWAK SANGH (REG.)- TRADE UNION OF 'WORKMAN'. (@railsewaksangh) February 12, 2026
क्योंकि इसी के माध्यम से भारतीय रेलवे के वर्कमैन (WORKMEN), वेतनबोर्ड (WAGE BOARD) गठित कराकर कार्य के अनुरूप अपना सही वेतन और रिटायर होने के उपरान्त 'पेंशन' आदि के अधिकार को लेकर अपनी गरिमा, सुरक्षा और एक साझा भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
सच्चिदानन्द श्रीवास्तव, महामंत्री pic.twitter.com/tJ6B8zffAV
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